अपने पक्के इरादे और कड़ी मेहनत से अपने बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण वाव! मोमो की तरक्की हैं। एक मॉल में छोटे से कियोस्क से शुरू वाव! मोमो, आज देशभर में मशहूर हैं। जानिए कैसे दो कॉलेज ग्रेजुएट्स ने हासिल किया यह मुकाम।

सागर दाराणी और बिनोद कुमार वाह मोमो के को-फाउंडर हैं।

उन्होंने अपना कारोबार 30,000 रुपए से शुरू किया और आज आठ साल बाद उनके व्यापार की मुल्यांकन 100 करोड़ रुपये से ज्यादा हैं। वाव! मोमो के 8 शहरों में 96 आउटलेट हैं।

कोलकाता में सेंट जेवियर्स कॉलेज से बी कॉम कोर्स पूरा करने के बाद, सागर और बिनोद, फूड इंडस्ट्री में प्रवेश करना चाहते थे। उन्होंने एक मोमो के आउटलेट के खोलने के बारे में सोचा। उनका मानना था कि पिज्जा, बर्गर इत्यादि के आउटलेट पहले से ही मौजूद थे लेकिन किसी ने मोमो के साथ ऐसा प्रयोग नहीं किया था।

बिनोद नेपाल से थे तो उन्हें मोमो से लगाव था। ऐसा माना जाता है कि मोमो असल में नेपाल के पकवान हैं। वहीं सागर मोमो खाने के शौकीन थे।

सागर के पिता ने उन्हें 30,000 रूपए का लोन दिया। वहीं कोलकाता के जादवपुर में एक रिश्तेदार के 3 मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर को उन्होने अपने रसोईघर के रूप में उपयोग करना शुरू किया और उसे नाम दिया वाव! मोमो।

200 वर्ग फुट की रसोई, एक टेबल, मामूली वेतन पर दो पार्ट-टाईम कुक, स्थानीय किराने की दुकान से क्रेडिट पर ली गई सामग्री से उन्होनें अपने व्यवसाय की शुरुआत की।

इसके बाद बिनोद और सागर ने दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज में स्पेंसर मॉल में एक महीने के लिए किराए पर 18 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी पर एक छोटा-सा कियोस्क लिया।


कियोस्क को बनाने में और खाना पकाने के लिए कुछ बर्तन खरीदने के लिए उन्होनें 30,000 रुपये की उधार राशि का इस्तेमाल किया। 2 अगस्त 2008 को कियोस्क को खोला गया।

वे दोनों ऑटो से यात्रा करते थे, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बाजार के प्रवेश द्वार पर खड़े होकर लोगों में पाम्पलेट वितरित किया करते थे और अपने ग्राहकों को मुफ्त मोमो सैम्पल भी दिया करते थे।

ऐसा करके उनके पहले दिन की बिक्री 2,200 रुपए की हुई और महीने के अंत तक वह 53,000 रुपए की बिक्री कर चुके थे।

ग्राहकों के सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए स्पेंसर के प्रबंधन ने उन्हें अपनी अन्य शाखाओं में कियोस्क स्पेस देने की पेशकश की।

अगले दो वर्षों में वाव! मोमो ने शहर के विभिन्न हिस्सों में मॉल और हाइपरमार्केट में मोमो के छह ऐसे ही कियोस्क खोले।

2010 में, 14 लाख रुपये के निवेश के साथ वाव! मोमो ने कोलकाता के साल्ट लेक सेक्टर V में मोमो का पहला स्वतंत्र आउटलेट खोला।

जादवपुर की वह रसोई जहां से उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया था वह अब 1,200 वर्ग फीट तक फैल चुका है और अब शहर भर में मामो आउटलेट में मोमो की आपूर्ति के लिए केंद्रीकृत रसोई है। इमारत की पहली मंजिल अब उनकी कंपनी का मुख्यालय है।

वाव! मोमो ने स्किल्स डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेनरशिप, भारत सरकार से राष्ट्रीय अॉन्त्रेप्रेंयूर्शिप पुरस्कार 2016 और वर्ष 2018 की सबसे अधिक पसंदीदा भारतीय मूल क्विक सर्विस रेस्टोरेंट सहित कई पुरस्कार और प्रशंसा अर्जित की है।

फरवरी 2018 में कंपनी का मूल्यांकन 280 करोड़ रुपये किया गया था।

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